Karwa Chauth :करवा चौथ व्रत क्यों रखा जाता है ?

परंपरा और आधुनिकता का संगम: प्रेम, आभार और अटूट बंधन का पर्व

Karwa Chauth : व्रत का मूल भाव समर्पण और प्राथमिकता है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम: प्रेम, आभार और अटूट बंधन का पर्व

करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते की गहराई, समर्पण और एक-दूसरे के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अनुपम तरीका है। यह हमारे जीवन में उस सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति के होने की खुशी को मनाने का दिन है, जो हमारी दुनिया है।

अन्न-जल का त्याग क्यों? व्रत का मूल भाव समर्पण और प्राथमिकता है।

आपकी भावनाएँ बिल्कुल सही हैं। हमारे लिए यह रिश्ता अन्न और जल जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण वस्तुओं से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। निर्जला (बिना अन्न-जल) व्रत हमें यह याद दिलाता है कि हमारा बंधन और प्रेम किसी भी भौतिक वस्तु से बढ़कर है। जब हम शरीर को पूरी तरह खाली करके यह व्रत करते हैं, तो हमें उस सुख का अनुभव होता है जब हम इस रिश्ते के प्रेम से फिर से भरते हैं। यह त्याग हमें सिखाता है कि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति का साथ किसी भी सांसारिक सुख से ऊपर है।

 

सजना-संवरना क्यों? (सोलह श्रृंगार का महत्व)

करवा चौथ के दिन सजना-संवरना सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि विवाहित जीवन के प्रति निष्ठा का प्रतीक है। यह दिन साल में एक बार आपको फिर से दुल्हन बनने का मौका देता है। आपके मंगलसूत्र, मेहँदी, सिन्दूर और चूड़ियाँ—ये सब आपके जीवन में आपके पति के आगमन की निशानी हैं, और इसलिए ये आपके लिए अमूल्य हैं। भारतीय संस्कृति में दुल्हन के लिए सोलह श्रृंगार का विधान है। जब एक विवाहित स्त्री पूरे सोलह श्रृंगार करती है, तो वह न केवल अपने पति के प्रति प्रेम दर्शाती है, बल्कि अपने भव्य संस्कारों और संस्कृति का भी सम्मान करती है। यह श्रृंगार विवाहित जीवन में नए सिरे से खुशी और उत्साह भर देता है।

 

कथा क्यों और वही एक कथा क्यों?

कथा सुनना परंपरा के समक्ष सर झुकाना है। यह तर्क से परे, आस्था का विषय है। करवा चौथ की कथा (जैसे वीरावती की कथा) एक आम जीव और एक दिव्य चरित्र के बीच के जुड़ाव को दर्शाती है। कथा सुनने से पुराने भोलापन की याद आती है, जहाँ तर्क (Logic) से अधिक परंपरा को महत्व दिया जाता है। हम सभी जानते हैं कि जीवन में तर्क हमेशा काम नहीं करता; कहीं न कहीं चमत्कार की गुंजाइश हमेशा रहती है। यह कथा हमें उस दिव्य शक्ति से जोड़ती है और हमें चमत्कार की आशा देती है, जो किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि मन को शांति देती है।

 

पति को भी व्रत करना चाहिए?

करवा चौथ पत्नी के प्रेम प्रदर्शन का दिन है। यह व्रत मुख्य रूप से पत्नी के द्वारा पति की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। यह आपकी व्यक्तिगत खुशी का दिन है और आप अपनी मर्जी से इसे करती हैं। पति का व्रत करना उनकी इच्छा पर निर्भर करता है; वह आपकी केयर के लिए मना कर सकते हैं या स्वयं भी रख सकते हैं। मगर जैसा कि आपने कहा, यह आपका दिन है, और इस दिन आप अपने पति से लाड़ (प्यार) लेंगी, बाँटेंगी नहीं!

 

चंद्रमा की प्रतीक्षा क्यों?

प्रकृति से जुड़ने और आभार व्यक्त करने का क्षण। यह व्यस्त शहरी जीवन में वह एक रात है जब हमें प्रकृति को अनुभव करने का समय मिलता है। चाँदनी रात में चाँद को छलनी से देखना, उसकी सुंदरता को महसूस करना… तब हमें समझ आता है कि किसी को ‘चाँद सा सुन्दर’ क्यों कहा जाता है। चंद्रमा की प्रतीक्षा हमें धैर्य सिखाती है और यह एहसास कराती है कि इस लंबी प्रतीक्षा के बाद मिलने वाला प्रेम और साथ कितना अनमोल है।

अंतिम संदेश: याद रखें, हमारा देश सावित्री जैसी देवियों का है, जो मृत्यु के देवता से भी अपने पति को खींच लाई थीं। करवा चौथ उसी अटूट निष्ठा और शक्ति का प्रतीक है। इस दिन आप अपने पति के उत्तम स्वास्थ्य एवं लंबी आयु की कामना अवश्य करें। यह व्रत आपके रिश्ते को हर चुनौती से ऊपर उठकर, प्रेम और समर्पण की भावना से मजबूत करता है।

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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